दर्शन समय
सुबह 4:00 am से दोपहर 12:00 pm तक
दोपहर 3:00 pm से रात 8:00 pm तक
Pawhari Baba Ashram
Kurtha, Ghazipur, Uttar Pradesh
पावन धाम - श्रद्धा और सेवा
एक पावन स्थान, जहां सेवा, साधना, सत्संग और अतिथि-सत्कार की परंपरा आज भी श्रद्धा से निभाई जाती है।
संत शिरोमणि पवहारी बाबा का जीवन तप, योग, भक्ति, सेवा और विनम्रता का जीवंत संदेश है। वे स्वयं को दास कहते और प्रत्येक प्राणी में नारायण का दर्शन करते थे।
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हिन्दू धर्म में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है। धार्मिक महत्वपापों से मुक्ति: मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।अश्वमेघ यज्ञ का फल: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने पर अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत के प्रभाव से मृत्यु के बाद भक्त को विष्णुलोक (बैकुंठ धाम) की प्राप्ति होती है।राजा हरिश्चंद्र की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने संकट के दिनों में महर्षि गौतम के कहने पर अजा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उनके सारे कष्ट दूर हुए और उनका खोया हुआ राज्य तथा परिवार वापस मिल गया।
कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की एक कारागार में मध्यरात्रि (रात 12 बजे) रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है।उनका जन्म धरती से अन्याय, पाप और कंस जैसे दुष्टों का नाश करने तथा धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। व्रत: भक्तजन, भगवान कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए जन्माष्टमी के पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात में जन्म के समय पूजा के बाद पारण करते हैं।मध्यरात्रि अभिषेक: रात 12 बजे बाल गोपाल (कृष्ण के बाल स्वरूप) का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल यानी पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।श्रृंगार और भोग: भगवान को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर तथा फलों का भोग लगाया जाता है। भोग में तुलसी दल अवश्य रखा जाता है।झूला झुलाना: लड्डू गोपाल को पालने या झूले में बिठाकर प्रेम से झुलाया जाता है।दही हांडी: जन्माष्टमी के अगले दिन महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में 'दही हांडी' का उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो कृष्ण की बाल लीलाओं की याद दिलाता है।
सावन का दूसरा सोमवार -- सावन के दूसरे सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे मन को शांति मिलती है, जीवन के कष्ट व बाधाएं दूर होती हैं, स्वास्थ्य सुधरता है, और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
उपासना छोड़नी नहीं चाहिए। आराध्य और आराधक का सम्बन्ध उच्च है।- पवहारी बाबा
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