दर्शन समय
सुबह 4:00 am से दोपहर 12:00 pm तक
दोपहर 3:00 pm से रात 8:00 pm तक
Pawhari Baba Ashram
Kurtha, Ghazipur, Uttar Pradesh
पावन धाम - श्रद्धा और सेवा
एक पावन स्थान, जहां सेवा, साधना, सत्संग और अतिथि-सत्कार की परंपरा आज भी श्रद्धा से निभाई जाती है।
संत शिरोमणि पवहारी बाबा का जीवन तप, योग, भक्ति, सेवा और विनम्रता का जीवंत संदेश है। वे स्वयं को दास कहते और प्रत्येक प्राणी में नारायण का दर्शन करते थे।
पूरा जीवन पढ़ें
पवहारी बाबा का मेला
पवहारी बाबा का मेला
पौराणिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा को महाभारत के रचयिता वेद व्यास का जन्म दिवस माना जाता है. उनके सम्मान में इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद की रचना की थी और इसी कारण से उनका नाम वेद व्यास पड़ा गुरु-पूर्णिमा को व्यास-पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह महाभारत के रचयिता व्यास के सम्मान में आषाढ़ पूर्णिमा को मनाया जाता है। पूर्णिमा पूर्णता या परिपूर्णता का प्रतीक है, ऊर्जा की पराकाष्ठा का। गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब विद्यार्थी या शिष्य इस परिपूर्णता के अनुभव के साथ पूर्ण कृतज्ञता से भर उठता है। गुरु पूर्णिमा का दिन, अन्य दिनों की तुलना में, अपने गुरु से प्राप्त ज्ञान के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण दिन है।
उपासना छोड़नी नहीं चाहिए। आराध्य और आराधक का सम्बन्ध उच्च है।- पवहारी बाबा
आपका सहयोग पूजा, आरती, भंडारा, सत्संग, श्रद्धालुओं की सेवा और आश्रम व्यवस्था में उपयोग किया जाता है। Payment के बाद अपनी जानकारी भरें ताकि आश्रम की ओर से धन्यवाद संदेश भेजा जा सके।
QR / UPI से दान करें
पवहारी बाबा आश्रम
कुर्था, गाजीपुर
उत्तर प्रदेश - 233301
फोन: 9450718601
दिशा देखें

