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आश्रम की प्रथम पत्रिका ज्ञान-दर्शन ऑनलाइन प्रति बुक करें अधिकमास की परमा एकादशी 11जून को है I 11 जून 2026 को अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की 'परमा एकादशी' (जिसे पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहते हैं) मनाई जाएगी。 निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा सुविचार --'' जो स्वयं को पहचान लेता है वो संसार को पहचान जाता है I '' पवहारी बाबा का मेला , प्रसिद्ध रथ यात्रा और उसका भव्य मेला गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा

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पवहारी बाबा का मेला
16Jul 2026

पवहारी बाबा का मेला

पवहारी बाबा का मेला , प्रसिद्ध रथ यात्रा और उसका भव्य मेला गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा I

25 जून 2026 को मनाई जाने वाली निर्जला या भीमसेनी एकादशी है I
25Jun 2026

25 जून 2026 को मनाई जाने वाली निर्जला या भीमसेनी एकादशी है I

वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा。 इसे 'भीमसेनी एकादशी' भी कहा जाता है और यह साल की सबसे कठोर और पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है I इस व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग करना होता है。ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु सभी 24 एकादशियों का उपवास नहीं कर पाते, वे केवल इस एक एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं I निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा यह कथा महाभारत काल से जुड़ी है。महाबली भीमसेन को बहुत तेज भूख लगती थी, जिसके कारण वे एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे。इस बात से वे काफी दुखी रहते थे。एक दिन वे महर्षि वेद व्यास के पास गए और अपनी समस्या बताई。उन्होंने कहा, "हे गुरुदेव! मेरे पेट में 'वृक' नाम की अग्नि है, जिस कारण मैं व्रत नहीं कर सकता। कृपया मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मुझे साल भर की एकादशियों का पुण्य मिल सके।"महर्षि वेद व्यास ने भीम की समस्या को समझते हुए उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत करने की सलाह दी。व्यास जी ने बताया कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बिना जल और अन्न के उपवास रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्य फल प्राप्त होता है。ऋषि के वचनों का पालन करते हुए भीमसेन ने पूरी श्रद्धा और नियम से यह व्रत रखा。बिना जल के व्रत करने के कारण ही इसे पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है

परमा एकादशी
11Jun 2026

परमा एकादशी

11 जून 2026 को अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की 'परमा एकादशी' (जिसे पुरुषोत्तमी एकादशी भी कहते हैं)